Monday, June 27, 2011

बिजली की वो अनोखी बाला
लेकर भागा एक बादल काला
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चमक उलट झलक झलक के
अपनों पे ही गरज गरज के
खाँक हो गयी बिजली मिट्टी मैं
देख काला वो आग का धुँआ
देखो फिर काला बादल मुस्काया
तेरी रुसवाई जाने और कितने रंग दिखलाएगी
भीड़ मैं भी हमे सिर्फ तुम संग छोड़ जाएगी
हर लम्हा तुम संग जीने पर मजबूर हैं हम
दुनिया जिसे तेरा दीवाना कहती हैं , वहि हैं हम
खुशियाली भरी पड़ी थी जब तक थे वो
प़र काँट हमारे , खुशियोंसंग उड़ गए वो

अम्बिया पर टंगे उस झुले पर
आज कोई नया परिंदा झुमना चाहता हैं
हमारे संग और कोई प्यार से
बतियाना चाहता हैं
आने का वादा करनेवाले यादोंमेही आते हैं
जाते हुए हमे , हमारी अपनी दुनिया से भी रुसवा कर जाते हैं