Tuesday, August 23, 2011

कविता करू नकोस म्हणाली ती
टोचतात ....
म्हणजे आता जखमेवर खपली पण नाही
किमान थोड़ी धार तरी कमी कर
पण मग अश्या बोथट शस्त्राने काय नेम साधणार
थोडा विचार कर ना माझी लेखणी टोचणी का होतिए
कदाचित माझ्या आयुष्यातली तुझी कमी ती दाखवतीए ..

Wednesday, August 17, 2011

साहिल पर बैठे
हमने खूब ग्यान दिया था
अब जब दरिया मैं डुबे हैं तो
सहारे का मतलब जाना हैं

कुछ इस कदर फ़िदा हैं वो हमपे
के समज़ना भी नहीं चाहते
मोतीयोंके दाम पत्थर चुन चुके हैं वो