Monday, January 13, 2014

रब तुने ऐसी कैसी किस्मत लिख डाली
चाह था संग सुहाना , पर छाई है तनहाई
आँखे खोली मैंने , दिल भी धड़का
मैया तुने छुड़ाया , साथ तेरी कोख का

हाय ऐसा कैसा बाबुल बिटियाँ न चाहे
ना देखे आँसु , लफ्ज कुछ न सुन पाए
मोरा था सब कुछ तुझसे , ओ मोरी मैया
तुने ही कर दिया है , मुझको पराया

भाई संग नाही गुंजी , मोरी पैंजनिया
तोरे संग नाही की , प्यारभरी बतिया
जा रही हु दूर तुझसे , पर ना कोई शिकवा
अगला जनम पाऊ , बनके तोरिही बिटियाँ

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