वो सुबह ही क्या
जिसमे तेरे हाथोंकी चाय न हो
वो दिन ही क्या
जिसमे तेरी पायल की छनछनाट न हो
वो फिजा ही क्या
जिसमे तेरे ज़ुल्फोंकी मेहक न हो
और वो जिंदगी ही क्या
जिसमे तू न हो
जिसमे तेरे हाथोंकी चाय न हो
वो दिन ही क्या
जिसमे तेरी पायल की छनछनाट न हो
वो फिजा ही क्या
जिसमे तेरे ज़ुल्फोंकी मेहक न हो
और वो जिंदगी ही क्या
जिसमे तू न हो
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