बिछडें जब हम तो पलकें दोनोंकी भरी थी
हमारी आसुओंसे तो उनकी नए सपनोंसे
गम से बेजार हम , अपनोंके सामने खुल के रो भी न सके
पर न जाने कैसे ये हसरत भी हमारी पूरी हो गयी
हमारी आसुओंसे तो उनकी नए सपनोंसे
गम से बेजार हम , अपनोंके सामने खुल के रो भी न सके
पर न जाने कैसे ये हसरत भी हमारी पूरी हो गयी
अचानक गरमी के मौसम मैं आसमान रो पड़ा
और बुन्दोमें हमारे आसुओंको पनाह मिल गयी
No comments:
Post a Comment