Friday, May 27, 2011

बिछडें जब हम तो पलकें दोनोंकी भरी थी
हमारी आसुओंसे तो उनकी नए सपनोंसे
गम से बेजार हम , अपनोंके सामने खुल के रो भी सके
पर जाने कैसे ये हसरत भी हमारी पूरी हो गयी
अचानक गरमी के मौसम मैं आसमान रो पड़ा
और बुन्दोमें हमारे आसुओंको पनाह मिल गयी



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